चिट्ठाजगत कभी कभी मुझे अचंभित कर देता है । आज ही मैने "Peak Oil Panel Discussion" में भागीदारी की और आज ही अपने ज्ञानदत्त पाण्डेयजी ने
तेल पर एक लेख लिख डाला । मैं इस पैनल डिस्कशन के बाद ऊर्जा और तेल पर लेखों की एक सीरीज लिखने के बारे में सोच रहा था लेकिन पाण्डेय जी ने अपने लेख से उस सोच को मूर्त रूप दिया है । इसलिये पेश है इस सीरीज का पहला लेख:
पिछले कुछ महीनो में शायद कोई ही हो जिसने कच्चे तेल की बढती कीमतों पर विचार न किया हो । कल कच्चे तेल का दाम ~ १२० डालर प्रति बैरल था; लेकिन आज से लगभग ४ वर्ष पहले ५० डालर प्रति बैरल का दाम असम्भावित सा लगता था । मैं अपनी रोजी रोटी तेल से सम्बन्धित शोध कार्य से कमाता हूँ इसलिये इस क्षेत्र की अधिक से अधिक जानकारी रखना मेरी मजबूरी है । इस विषय से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने के लिये मैं इस सीरीज को आरम्भ कर रहा हूँ और मुझे खुशी होगी अगर आपके प्रश्नों को इस सीरीज में शामिल किया जा सके ।
तेल से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।
१) क्या अगले १०-२०-३० वर्षों में तेल समाप्त हो जायेगा ?
२) अगर नहीं तो तेल का दाम अगले वर्षों में क्या होगा ?
३) तेल के बाद का भविष्य क्या है ? क्या तेल के समाप्त होने के बाद हम आर्थिक स्पाईरल (Downwards) देखेंगे ?
४) तेल के आगे और जहाँ कौन कौन से हैं?
आज हमारे पास कितना तेल बचा है इसका अलग लोगों के पास अलग जवाब है । लेकिन उससे पहले कुछ तथ्य इस प्रकार हैं । आज तक कुल मिला कर हम सब ने लगभग १ ट्रिलियन बैरल तेल का उपयोग किया है ।
१ ट्रिलियन बैरल = १००० बिलियन बैरल = १०००,००० मिलियन बैरल = १०^(१२) बैरल
तेल के मामले में हबर्ट का सिद्धान्त बेहद प्रसिद्ध है । हबर्ट के अनुसार जब कच्चे तेल का उत्पादन अपने चरम पर होगा उस समय तक हमने अपने तेल का ५० प्रतिशत भाग प्रयोग कर लिया होगा । उसके बाद चाहकर भी हम तेल का उत्पादन एक निश्चित दर पर नहीं रख पायेंगे और तेल का उत्पादन गिरता रहेगा जब तक कि हम पूरा तेल प्रयोग नहीं कर लेते । हबर्ट ने अमेरिका के सन्दर्भ में कहा था कि तेल का उत्पादन १९६८ में अपने चरम पर होगा और १९७० में अमेरिका में तेल का उत्पादन अपने चरम पर था । १९७० के बाद अमेरिका में तेल का उत्पादन लगातार गिरता जा रहा है । इस लिहाज से देखा जाये तो हबर्ट का सिद्धान्त अमेरिका के सन्दर्भ में लगभग सही सिद्ध सा होता दिखता है ।
अगला महत्वपूर्ण प्रश्न है, कि क्या ग्लोबल तेल उत्पादन में भी हबर्ट का सिद्धान्त लागू होता है । क्या ग्लोबल तेल उत्पादन भी अपने चरम पर आकर गिरना शुरू होगा ? अगर हाँ तो ये कब होगा, या फ़िर ग्लोबल तेल उत्पादन अपने चरम पर आ चुका है ? यदि ऐसा है तो क्या हमारे पास केवल अगले १०-२०-३० साल का तेल बाकी है ? अगले कुछ सालों में तेल के दाम बढने/घटने की क्या सम्भावना है ? भारत और चीन जैसे विकासशील देश ग्लोबल तेल की आपूर्ति और दामों पर क्या असर कर रहे हैं ?
इस सीरीज में हम ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे । इस सीरीज की पहली कडी को पूर्ण करने के लिये हम एक प्रश्न की तह में जाने का प्रयास करेंगे । बाकी महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर क्रमश: अगली कडियों में मिलेंगे ।
प्रश्न १: आखिर कुल कितना तेल बाकी है इस धरती पर ???
उत्तर: कच्चे तेल को दो प्रमुख भागों में बाँटा जा सकता है । पहला Conventional Oil और दूसरा Un-Conventional Oil । Conventional Oil का मतलब है कि ऐसा तेल स्रोत जिससे अभी तक तेल निकाला जाता रहा है । उदाहरण के तौर पर सऊदी अरब, मेक्सिको, लिबिया, नाईजिरिया और अन्य सभी सुने हुये स्रोत । Conventional Oil निकालने के लिये तरीका आसान है । पहले तेल का कुँआ खोदकर Pressure Depletion से जितना तेल निकले निकाल लो । उसके बाद पानी Inject करके और तेल निकालो । Conventional Oil लगभग
६ से ९ ट्रिलियन बैरल की मात्रा में उपलब्ध है ।
Un-conventional Oil के कई प्रकार हैं, कनाडा में उपलब्ध
Tar sand, अमेरिका और अन्य स्थानों पर उपलब्ध
Oil Shale और
अन्य भारी तेल के स्रोत । इसके बारे में इतना समझ लें कि ये टेढी खीर है । इस प्रकार के तेल की श्यानता (Viscosity) इतनी अधिक होती है कि ये आसानी से बहता (Flow) नहीं करता है और इसके बारे में आजकल काफ़ी शोध चल रहा है । Un-Conventional Oil लगभग
२ से ७ ट्रिलियन बैरल की मात्रा में उपलब्ध है ।
इसके अलावा महत्वपूर्ण है कि इसमें से
Recovery Efficiency क्या है ? मान लीजिये १०० बैरल तेल मौजूद है तो इसमें से अगर आप ४० बैरल निकाल पायें तो आपकी
Recovery Efficiency 40 % हुयी । आजकल ग्लोबली Recovery Efficiency लगभग ३०-३५ % है । Un-Conventional Oil के सन्दर्भ में Recovery Efficiency लगभग १०-२० % है ।
इस लिहाज से देखा जाये तो अभी भी लगभग ४-६ ट्रिलियन बैरल तेल अभी और निकाला जा सकता है । दूसरे शब्दों में अभी केवल एक चौथाई से भी कम तेल निकाला गया है । इस अंदाजे से अभी ग्लोबल हबर्ट पीक दूर की कौडी है ।
तेल मौजूद है बस निकालने वाले चाहिये । इसमें भी एक समस्या है, अगर तेल की माँग बढती गयी और इसी दर से तेल की आपूर्ति नहीं बढी तो निश्चित तौर पर तेल के दाम बढेंगे । जैसे जैसे तेल के दाम बढेंगे, तेल कम्पनियों का फ़ायदा बढेगा और तेल कम्पनियाँ Un-Conventional Oil/Alternate Energy में निवेश करके भविष्य के तेल/ऊर्जा की माँग के सन्दर्भ में आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगी ।
बाटम लाईन: अभी चिंतित होने की जरूरत नहीं है । तेल है और अगले ३०-५०-६०-८०-१०० वर्षों तक रहेगा । लेकिन केवल तेल के रहने से समस्यायें हल नहीं होंगी, इसीलिये इस लेख की अगली कडी में हम अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करेंगे ।
यदि इस सन्दर्भ में आपके कोई प्रश्न हैं तो आप टिप्पणी के माध्यम से पूछ सकते हैं । हम उनके उत्तर देने का भरसक प्रयास करेंगे ।