हम बदलते हैं, तो समाज बदलता है। बहुत सी बाते जो आज समाज में मान्य नहीं है समय के साथ स्वीकार्य हो जायेगीं। और बहुत सी बातें जो भले ही दूसरों को दुख देती हों, उन्हें हम आज डंके की चोट पर सिर्फ़ इसलिए कह पाते हैं क्योंकि वो क्षम्य हैं, स्वीकार्य हैं।
समय आज ही बडी तेजी से नहीं बदल रहा है बल्कि हमेशा से ऐसा ही रहा है। सोचना आपको है कि आपको इस बदलाव को किस रूप में स्वीकार करना है। बदलाव केवल अच्छे ही नहीं होगें और न ही आप केवल उन बदलावों को चुन सकते हैं जो आपको पसन्द हों। समय के बदलाव एक पैकेज्ड डील की तरह होते हैं और उन्हे उसी रूप में स्वीकार करना चाहिये।
आभार,
नीरज रोहिल्ला































रोचक विज्ञापन, अब यह संभव न होगा, जागरण हो चुका है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंदुनिया बदल रही है .....आदमी भी एक छोटे से स्पेस में . कैसे ज्यादा कमीनापन डाले सीख रहा है इसको इन्वेंशन कहते है
प्रत्युत्तर देंहटाएंअभी भी बहुत सी बातें हैं जो कल को ऐसी ही बेवकूफी भरी और एक्सट्रीम लगेंगी !
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बहुत सी बाते जो आज समाज में मान्य नहीं है समय के साथ स्वीकार्य हो जायेगीं। और बहुत सी बातें जो भले ही दूसरों को दुख देती हों, उन्हें हम आज डंके की चोट पर सिर्फ़ इसलिए कह पाते हैं क्योंकि वो क्षम्य हैं, स्वीकार्य हैं।
समय आज ही बडी तेजी से नहीं बदल रहा है बल्कि हमेशा से ऐसा ही रहा है। सोचना आपको है कि आपको इस बदलाव को किस रूप में स्वीकार करना है। बदलाव केवल अच्छे ही नहीं होगें और न ही आप केवल उन बदलावों को चुन सकते हैं जो आपको पसन्द हों। समय के बदलाव एक पैकेज्ड डील की तरह होते हैं और उन्हे उसी रूप में स्वीकार करना चाहिये।
काश यह जीवन-दर्शन हम सभी समझ पायें...
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great post neeraj
प्रत्युत्तर देंहटाएंcan i use some advts from here for naari blog
uff
प्रत्युत्तर देंहटाएंसमय बलवान है .....हीलर या किलर !
प्रत्युत्तर देंहटाएंओ................ह!
प्रत्युत्तर देंहटाएंkahan se mile aapko ye ads....nice to know old Western stuff!
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