शनिवार, मई 24, 2008

चित्रों द्वारा कांटिनेन्टल ड्रिफ़्ट की कहानी!!!

Geology अथवा भूविज्ञान विज्ञान की चमक्कृत कर देने वाली शाखा है । इस शाखा से सम्बन्धित आज की कडी में हम "कान्टिनेंटल ड्रिफ़्ट" के बारे में जानेंगे ।

पहले मैं इस विषय पर केवल लेख लिखने के बारे में सोच रहा था लेकिन बाद में सोचा कि इस कहानी को चित्रों के माध्यम से सुनाया जाये तो अधिक रोचक रहेगी । Abraham Ortelius (1596), Francis Bacon (1620), Benjamin Franklin, Antonio Snider-Pellegrini (1858) नाम के विभिन्न विचारकों ने काफ़ी पहले सोचा था कि विभिन्न प्रायद्वीपों के एक साथ रखा जाये तो एक चित्र पहेली सी बनती है और ऐसी सम्भावना हो सकती है कि लाखों वर्ष पहले ये सभी प्रायद्वीप आपस में जुडे हुये हों ।

Alfred Wegener ने १९१२ में इस विषय पर गहन शोध किया और केवल द्वीपों की आकृति ही नहीं बल्कि विभिन्न चट्टानों और जीवाष्मों का अध्ययन करके Continental Drift का सिद्धान्त प्रस्तुत किया । वेगनर के अनुसार लगभग ३००० लाख वर्ष पहले सभी द्वीप आपस में जुडे हुये थे और धीरे धीरे ये द्वीप एक दूसरे से खिसकते चले गये । भारतीय द्वीप कुछ समय के लिये एक अलग द्वीप बना लेकिन कालान्तर में यूरेशिया द्वीप से टकरा गया और इस प्रकार महान हिमालय की पहाडों की रचना हुयी ।

वेगनर के सिद्धान्त को शुरूआत में वैज्ञानिकों ने अधिक महत्व नहीं दिया लेकिन इसके बावजूद वेगनर १९१०-१९३० तक अपने सिद्धान्त के पक्ष में तर्क एकत्र करते रहे । वेगनर अपने समकालीन वैज्ञानिकों को ये न समझा सके कि इतने विशालकाय द्वीप किस बल के कारण एक दूसरे से इतने दूर चले गये । वेगनर ने द्वीपों की गति के लिये दो विचार प्रस्तुत किये थे लेकिन ये दोनो ही विचार लगत थे । इसके कारण वेगनर के सिद्धान्त को लगभग १९५०-६० के आस पास ही वैज्ञानिकों की स्वीकृति मिल सकी ।

इसके बाद की कहानी आप चित्रों को देखें और खुद ही समझें :-)



चित्र १: अफ़्रीका और दक्षिणी अमेरिका एक दूसरे के साथ ऐसे फ़िट होते हैं
जैसे किसी चित्र पहेली का भाग हों । इसके अलावा गुलाबी रंग से दर्शायी हुयी
एक प्रकार की चट्टानों एवं भूसंरचना का अफ़्रीका और दक्षिणी अमेरिका में पाया
जाना इस थ्योरी को अधिक बल प्रदान करती है ।



चित्र २: विभिन्न प्रायद्वीपों की लाखों वर्ष पहले की स्थिति


चित्र ३: एक एनिमेशन जिसके द्वारा आप देख सकते हैं कि समय के साथ
विभिन्न प्रायद्वीप किस प्रकार अलग अलग हुये ।


इस चित्र में आप देख सकते हैं कि केवल चट्टाने ही नहीं बल्कि विभिन्न जीवों के जीवाश्म भी इस थ्योरी को बल प्रदान करते हैं ।




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1 टिप्पणी:

  1. पता नहीं कभी इम्प्लोजन जैसा भी कुछ होगा - फिर पास आने लगें ये महा द्वीप!

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