रविवार, जुलाई 13, 2008

एक महबूबा की याद और फ़िर उसका मर्सिया !!!

जब मैं भारत में था (जुलाई २००४ तक) तो कभी मोबाईल फ़ोन का इस्तेमाल नहीं किया था । कभी इसकी जरूरत ही महसूस नहीं हुयी और न ही जेब में इतने पैसे थे कि इसका खर्चा उठा सकते । उसके बाद अगस्त में ह्यूस्टन के राईस विश्वविद्यालय में आये तो भी घर में एक लैंड लाईन लगवाने के बाद काम चल ही रहा था लेकिन थोडी असुविधा जरूर थी । शुरू शुरू में एक दो फ़ोन कम्पनियों से कहा कि भैया एक ठो मोबाईल दे दो तो बोले तुम इस देश में नये नये आये हो और तुमने कभी यहाँ पर उधार नहीं लिया है इससे तुम्हारी नीयत का कोई भरोसा नहीं है । लिहाजा हम तुम्हे पोस्ट पेड फ़ोन तो तब ही देंगे जब ५०० डालर नकद जमा करोगे । प्रीपेड लेने से हमने इंकार कर दिया, चूँकि खुद इनकी सरकार ने हमपे भरोसा करके अपने शोध का जिम्मा हमें सौंपा और इन नालायकों को हमारी नीयत पर ही भरोसा नहीं ।

खैर दिन कटते रहे और एक दिन स्कूल में एक मोबाईल कम्पनी वालों ने अपना तम्बू लगाया और कहा कि हम १२५ डालर जमा करने पर फ़ोन दे देंगे । उन्होने ये भी कहा कि हमारी नीयत पर पूरा भरोसा है लेकिन ससुरे पेपर वर्क के चक्कर में १२५ ले रहे हैं और वो भी सूद समेत ६ महीने के बाद लौटा देंगे । हमारे दोस्त ने कहा अब सब्र भी करो और दे दो १२५ डालर । तो प्यारे साथियों जनवरी २००५ में पहली बार हमने भी मोबाईल ले लिया । इसी के साथ अमेरिका के मोबाईल के कुछ अलग ढंग भी पता चले । ध्वनि संदेश (व्याईस मेल) से पहली बार वास्ता पडा, फ़ोन मिलाओ और अगर बन्दा फ़ोन न उठाये तो उसके ध्वनि संदेश के बाद अपना संदेश रेकार्ड कर दो । हमने भी पहली बार अपनी आवाज में संदेश रेकार्ड किया (Hi, This is Neeraj. I am unable to take your call right now but if you will leave your name, number and a brief message I will get back to you as soon as possible). ये भी पता चला कि मोबाईल शिष्टाचार के मुताबिक अगर कोई आपको ध्वनि संदेश छोडे तो उसको वापिस काल करने की जिम्मेवारी आपकी होती है ।

मेरे पिताजी एक बार बडे नाराज हुये, उन्होने मेरी आवाज सुनी और सोचा फ़ोन लग गया है और मुझे डांटना शुरू कर दिया :-) बाद में पता चला तो खूब हंसे । ये भी पता चला कि यहाँ हर महीने एक नियत मिनट (मेरे वाले प्लान में ४०० मिनट) मिलते हैं । फ़ोन मिलाने और उठाने दोनो में मिनट कटते हैं लेकिन शाम को ७ बजे के बाद से सुबह ७ बजे तक और शनिवार और रविवार को मिनट नहीं कटते हैं । मेरे तो बमुश्किल १५० मिनट खर्च हो पाते थे और हर महीने २५० मिनट बेकार चले जाते थे । मेरे पास जो मोबाईल फ़ोन था वो बडा सी सादा सा था और पाषाणकालीन लगता था, उसमें फ़ोटो, इंटरनेट आदि की रंगबाजी भी नहीं थी । ये रहा उसका फ़ोटो:


अब जल्दी से तीन साल आगे बढाते हैं और अचानक से हमने एक धांसू और चांपू सा फ़ोन लेने का निश्चय कर लिया । हमने नया फ़ोन लिया मोटोरोला Q9C, इसका फ़ोटो भी हाजिर है । ये फ़ोन तो एकदम जादू का पिटारा था, फ़ोन के साथ साथ इंटरनेट का तेज रफ़्तार कनेक्शन, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS), लाईव सर्च, टाईप करने के लिये बढिया की बोर्ड । ये नहीं कि "S" टाईप करना हो तो एक ही बटन को ४ बार दबाओ । खाने खाने जाना हो, तो फ़ोन को आदेश करो कि मैक्सिकन रेस्तरां खोजो और ३ मील के अन्दर के सभी रेस्तरां हाजिर । फ़िर बोलो कि हम जहाँ खडे हैं वहाँ से इस जगह जाने का रास्ता बताओ तो GPS की मदद से टर्न बाई टर्न निर्देश मिल जाते थे । सबसे मस्त लगता था कि पार्किंग लाट से अपनी लैब तक आते आते मैं १५-२० चिट्ठे पढ डालता था । आऊटलुक से मेरी ईमेल पलक झपकते मिल जाती थी । कुल मिला कर ये फ़ोन मेरी महबूबा बन गया था ।

लेकिन हर खुशी की उम्र छोटी ही होती है । ९ जुलाई की रात को हमारे युनिवर्सिटी के स्टूडेंट पब में मित्र लोगों के साथ बैठकर बीयर की चुस्कियों के साथ शतरंज खेलते हुये अचानक फ़ोन पर बात करने के बाद मैने फ़ोन को जेब में रखने की बजाय मेज पर रख दिया और दस मिनट बाद उसकी सुध ली तो वो वहाँ से गायब था । बडा दुख हुआ, फ़ोन खोने से बडा दुख इस बात का हुआ कि स्टूडेंट पब से फ़ोन चोरी हुआ हांलाकि उसमें कभी कभी स्कूल से बाहर के लोग भी आते हैं । इससे हमने सोचा कि घोर कलयुग आ गया है । अब बताईये शराबियों का भरोसा नहीं कर सकते तो आप आम लोगों की बात तो छोड ही दीजिये ।

हमने २ दिन तक इन्तजार किया कि शायद कोई तरस खाकर फ़ोन वापिस कर दे लेकिन ऐसा नहीं हुआ । मन मसोसकर अपने कमरे के एक कोने के कबाडे में उपेक्षित से पडे पुराने नोकिया वाले फ़ोन को झाड पोंछकर चमकाया और चालू किया । जब तक नया फ़ोन खरीदने के पैसे इकट्ठे न हों जाये, पुराने फ़ोन को ही कलेजे से लगाये रखना पडेगा । 

6 टिप्‍पणियां:

  1. नया फोन मिल जाए तो जिगर से लगा कर रखियेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  2. च्च च्च! आपसे सहानुभूति है। आपमें अगर हाई-फाई फोन से सच्ची आसक्ति है तो वह आपको देर सबेर मिलेगा ही। शोच न करें!
    यह तो जिन्दगी है, इम्तहान लेती है - आसक्ति का!

    उत्तर देंहटाएं
  3. हमारा तो अभी भी १५० मिनट और वीक ऐन्ड एंड इवनिंग फ्री है...पूरे १५० बेकार जाते हैं कभी दो तीन मिनट पत्नी इस्तेमाल कर लें तो बहुत आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  4. महबूबा को कहीं ऐसी लापरवाही से रखा जाता है। :) दूसरी पाने की बहाना तो नहीं :)

    उत्तर देंहटाएं
  5. हमको भी आपके महबूबा के खोने का बहुत दुःख है भाई :( महबूबा को थोड़ा संभाल कर रखियेगा आगे से :-)

    उत्तर देंहटाएं
  6. भईया हम तो अपने बच्चो के पुराने मोबाईल ले कर ही खुश हो जाते हे, फ़िर उस मे सब से सस्ता प्रीपेड कार्ड डाला, ओर मोबाईल जेब मे रखा, साल मे एक या दो बार ही इस से बात करते हे, जब समय खत्म तो १० € फ़िर से ...
    अजी शराबियो को बदनाम मत करो... कही बिल की जगह नशे मे मोबाईल ही तो नही दे दिया,शारबी तो बहुत सीधे साधे होते हे....:)

    उत्तर देंहटाएं

आप अपनी टिप्पणी के माध्यम से अपनी राय से मुझे अवगत करा सकते हैं । आप कैसी भी टिप्पणी देने के लिये स्वतन्त्र हैं ।