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मंगलवार, मार्च 27, 2007

भगवान सलामत रहें माँ बाप हमारे !

आज की इस पोस्ट को मैं अपने "माता-पिता" को समर्पित करता हूँ ।


इस पोस्ट में आपके लिये हाजिर है फ़िल्म "आप की परछाइयाँ" फ़िल्म का एक गीत । फ़िल्म सन १९६४ में आयी थी, संगीत मेरे पसंदीदा संगीतकार मदन मोहन जी ने दिया था और फ़िल्म के गीत लिखे थे "राजा मेंहदी अली खान" ने । ये वही गीतकार हैं जिन्होनें मदन मोहन जी के साथ अनेकों फ़िल्मों में यादगार नग्में लिखे ।

मदन मोहन जी के साथ "राजेन्द्र क्रष्ण " ने भी बहुत सुंदर गीत लिखे हैं परन्तु उन गीतों का जिक्र किसी और पोस्ट में करूँगा ।

फ़िलहाल उदाहरण के लिये पेश हैं "राजा मेंहदी अली खान" के कुछ नग्मों की फ़ेहरिस्त:

१) आपके पहलू में आकर रो दिये: मेरा साया (१९६६)
२) आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे: अनपढ (१९६२)
३) आपको प्यार छुपाने की बडी आदत है: नीला आकाश (१९६५)
४) एक हसीं शाम को दिल मेरा खो गया: दुल्हन एक रात की (१९६६)
५) है इसी में प्यार की आबरू:
अनपढ (१९६२)
६) लग जा गले फ़िर ये हसीं रात हो ना हो: वो कौन थी (१९६४)

अब फ़ुरसतियाजी के अन्दाज में मेरी पसन्द:

ये गीत फ़िल्म
"आप की परछाइयाँ" से है जिसके बोल इस तरह से हैं:


जब तक के हैं आकाश पे चाँद और सितारे,
भगवान सलामत रहें माँ बाप हमारे ।

माँ बाप का दिल है किसी तीरथ से भी प्यारा,
हँस हँस के उठाते हैं वो दुख दर्द हमारा,
फ़िर क्यों न हर एक साँस दुआ बन के पुकारे,
भगवान सलामत रहें माँ बाप हमारे ।

कहते हैं के माँ बाप का दिल जिसने दुखाया,
आकाश पे भगवान को भी उसने रुलाया,
दुनिया की हर एक चीज से माँ बाप हैं प्यारे,
भगवान सलामत रहें माँ बाप हमारे ।

जब तक के हैं आकाश पे चाँद और सितारे,
भगवान सलामत रहें माँ बाप हमारे ।

लो आज हमने छोड दिया रिश्ता-ए-उम्मीद !

लो आज हमने छोड दिया रिश्ता-ए-उम्मीद,
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम ।

हम थे जिनके सहारे वो हुये न हमारे,
डूबी जब दिल की नय्या सामने थे किनारे ।

जला दो जला दो जला दो ये बल्ला, मेरे सामने से हटा दो ये बल्ला,
तुम्हारा है तुम ही संभालो ये बल्ला ।

आज मैने भी भारत की शर्मनाक हार के बाद क्रिकेट में उम्मीद से रिश्ता तोड लिया ।

चर्चा/परिचर्चा के बीच थका हुआ क्रिकेट दुहाई दे रहा है कि मुझे खेल ही रहने दो किसी धर्म का नाम मत दो वरना मैं तुम्हे उसी तरह निराश करूँगा जैसे धर्म और मजहब इंसान को निराश करते हैं ।

बस आज और कुछ कहने का मन नहीं है । बस सब लोग संयम से काम लें और कोई किसी का घर न फ़ूँके, बाब वूल्मर की हत्या हो ही चुकी है अब कोई और निर्दोष इस खेल की बलि न चढ जाये ।