मंगलवार, मार्च 27, 2007

मैं छाँव छाँव चला था अपना बदन बचाकर !!!

आपकी सेवा में प्रस्तुत करता हूँ गुलजार साहब की दो नज्में,

१) तस्कीं

मैं छाँव छाँव चला था अपना बदन बचाकर
कि रूह को इक खूबसूरत सा जिस्म दे दूँ ,
न कोई सलवट, न दाग कोई, न धूप झुलसे न चोट खाये
न जख्म छुए, न दर्द पहुँचे,
बस एक कोरी कँवारी सुबह का जिस्म पहना दूँ रूह को मैं;

मगर तपी जब दोपहर दर्दों की
दर्द की धूप से जो गुजरा तो रूह को छाँव मिल गयी है;


मगर तपी जब दोपहर दर्दों की
दर्द की धूप से जो गुजरा तो रूह को छाँव मिल गयी है;
अजीब है दर्द और तस्कीं का सांझा रिश्ता
मिलेगी छाँव तो बस कहीं धूप में मिलेगी ।



२) शिकार

सुबह से शाम हुयी और हिरन मुझे छलावे देता
सारे जंगल में परेशान किये घूम रहा है अब तक,
उसकी गर्दन के बहुत पास से गुजरे हैं कई तीर मेरे
वो भी उतना ही हुश्यार है कि जितना मैं हूँ ;

इक झलक दे के जो गुम होता है वो पेडो में,
मैं वहाँ पहुँचू तो टीले पे, कभी चश्मे के उस पार नजर आता है
वो नजर रखता है मुझ पर
मैं उसे आँख से ओझल नहीं होने देता;

कौन दौडाये हुये है किसको,
कौन अब किसका शिकारी है
पता ही नहीं चलता;

सुबह उतरा था मैं जंगल में
तो सोचा था कि इस शोख हिरन को
नेजे की नोक पर परचम की तरह तानकर
मैं शहर में दाखिल हूँगा;

दिन मगर ढलने लगा है
दिल में एक खौफ़ सा बैठ रहा है
कि बिलाखिर ये हिरन ही मुझे सींगो पर उठाये हुये
एक गार में दाखिल होगा ।

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तस्कीं : सुकून, आराम, चैन
रूह: आत्मा
सांझा: मिला-जुला
चश्मा: छोटी झील
नेजे की नोंक: शिकार को मरणोपरांत बाँधने के लिये भाले जैसा यंत्र
परचम: झण्डा
बिलाखिर: अन्त में
गार: गुफ़ा

4 टिप्‍पणियां:

  1. शुक्रिया गुलजार की रचना हम सब से बाँटने के लिए । ये पंक्तियाँ खूब लगीं
    सुबह उतरा था मैं जंगल में
    तो सोचा था कि इस शोख हिरन को
    नेजे की नोक पर परचम की तरह तानकर
    मैं शहर में दाखिल हूँगा;

    दिन मगर ढलने लगा है
    दिल में एक खौफ़ सा बैठ रहा है
    कि बिलाखिर ये हिरन ही मुझे सींगो पर उठाये हुये
    एक गार में दाखिल होगा ।

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  2. "उदास पानी" नाम की एक एल्बम है मेरे पास गुलज़ार साहब की । उसमे ये पूरी नज़्म है । मुझे बहुत पसंद भी है ।
    उस एल्बम की एक और ख़ासियत ये भी है कि उसका पूरा संगीत अभिषेक रे नाम के एक बहुत ही युवा संगीतकार ने दिया है जो कि काफ़ी अच्छा लगा मुझे । क्या आपने सुना है उसे ?

    धन्यवाद, इसे प्रकाशित करने के लिये ।

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  3. भावनाओं का सुन्दर चित्रण किया है आप ने..

    मेरे बारे में जानने के लिये मेरे ब्लोग
    पर आइये .

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  4. नही दोस्त, मेरे पास सीडी नही है, कैसेट है । सीडी होती तो mp3 भेज सकता था तुम्हे आसानी से ।

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