मंगलवार, मार्च 27, 2007

मेरा वजन: ये बढता क्यों नहीं !

मित्रों, आज मैं अपनें मन की व्यथा आप सब के सामने रख रहा हूँ । आप सब लोग मेरी इस समस्या पर गौर फ़रमाइये और बताइये कि मेरा वजन बढता क्यों नहीं ???

बचपन से ही हम सीकिंया पहलवान टाईप के थे, इसके कुछ फ़ायदे और ढेर सारे नुकसान हमने ईश्वर को शीश नमन कर स्वीकार किये हैं । परन्तु अब लगता है कि ये सब मेरे ही साथ क्यों ? लोग बिना कुछ खाये फ़लते फ़ूलते जा रहे हैं और हम हैं कि कितनी भी मेहनत कर लो, नतीजा वही "सिफ़र" !!!

अत्याचारों का ये सिलसिला तब प्रारम्भ हुआ जब हम प्राथमिक विद्यालय में थे । दुबले पतले होने के कारण हमारे आचार्यजी हमें पंक्ति में सबसे आगे खडा कर देते थे । अब हमारी कक्षा के बाकी विद्यार्थी पीछे खडे होकर मौज लें और हमें रोज सुबह सुबह जूते चमकाकर, बाल बनाकर और राजा बबुआ टाईप का विद्यार्थी बनकर सबसे आगे रहना पडता था । बाकी लडके पंक्ति में सामने खडे लडके की चिंकुटी काट लेते थे, तो कभी स्याही वाले पेन से कुछ चित्र बना देते थे और हम चिल्लाते रह जाते थे कि कोई तो गोला पूरा कर लो ।

हमें सीरियस खडे होकर प्रात:स्मरण, एकात्मता स्त्रोत, सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र और शान्तिपाठ पढना होता था और हमारे पीठ पीछे माधुरी दीक्षित और रवीना और करिश्मा की बातें होती थी । इसी कारण हम हमेशा बबुआ बने रह गये और हमारी पंक्ति में सबसे पीछे खडे होने वाले "सलिल सक्सेना" ने हमारी पसंदीदा सहपाठी "सुनयना जोशी" से दोस्ती गाँठ ली । और तो और वो सलिल सक्सेना ठहरा हमारा सबसे बेस्ट/फ़ास्ट/अभिन्न फ़्रेंड/मित्र/जोडीदार । अब उस जमाने में लंगोट तो पहनते नहीं थे वरना लंगोटिया यार भी होता, वैसे भी हमारे घर वाले तो हमेशा से "यंग इंडिया" पर भरोसा रखते थे ।

दुबले पतले होने के कारण कुछ दादा टाईप के बच्चे हम पर खूब धौंस चलाते । इसी कडी में एक किस्सा याद आ रहा है। हमारा नाम नीरज है, हमारे क्रमांक से पहले "नागेन्द त्रिपाठी" और हमारे बाद "नीटू शर्मा" का नाम आता था । दोनो लडकों का पंडित होना मात्र एक संयोग है, मै इसे ब्राह्मणवर्ग का क्षत्रियों पर अत्याचार नहीं कहूँगा वरना फ़िर से "मोहल्ले" में नयी बहस प्रारम्भ हो जायेगी । यूँ कि अपनी मेहनत और घर पर पिताजी के सानिध्य में अध्ययन करने के कारण पडने वाली मार के डर से हम कक्षा में प्रथम/द्वितीय स्थान प्राप्त किया करते थे । एक दिन वार्षिक परीक्षाओं से पहले नीटू और नागेन्द्र ने हमें कोने में ले जाकर खूब हडकाया । नीटूजी हमसे जरा दो अंगुल लम्बे थे और नागेन्द्रजी की कद काठी लगभग आचार्यजी जितनी थी । दोनों ने हमको धमकी दी कि अगर परीक्षा में अपनी कापी टेढी नहीं की तो जिन्दा घर नहीं जा पाऊँगा, और अगर आचार्यजी को बताने की गलती की तो मेरा बस्ता पास के गटर में फ़ेंक दिया जायेगा ।


हम ठहरे सीधे साधे विद्यार्थी, आ गये दोनों की धमकी में और दोनों तब तक नकल करायी जब तक उनका मन नहीं भर गया । परीक्षा परिणाम में हम प्रथम, नीटू द्वितीय और नागेन्द्र भैया पंचम । नागेन्द्र ने फ़िर हडकाया कि मैने अगर उसकी तरफ़ ढंग से कापी टेढी की होती तो वो भी "टाप थ्री" में होता । लेकिन नागेन्द्र का ह्र्दय बडा विशाल था, वो कक्षा में पंचम आने पर ही प्रसन्न था । नीटू की खुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं था, उसके घर वालों ने परीक्षा में उसकी सफ़लता के लिये उसे एक नयी नवेली झक्कास साईकिल दिलवाई थी जिस पर वो हमें कभी कभी सवारी कर लेने देता था ।

हमारे जीवन में भ्रष्टाचार से ये हमारा पहला संपर्क था, हम हारे क्योंकि हमारा वजन कम था । अगर मेरा वजन भी नागेन्द्र के बराबर होता तो हमें यूँ मुँह की खानी न पडती ।

बचपन में वजन कम होने का एक फ़ायदा ये था कि जब शारीरिक शिक्षा के घंटे में हमें पिरामिड बनानें को कहा जाता था तो मैं सबसे ऊपर होता था । अपने बाकी मित्रों के कंधे पर चढकर मुझे लगता था मानों मैं उनके ऊपर विजयश्री की घोषणा कर रहा हूँ । कभी कभी आचार्यजी भी मुझपर तरस खाकर अपनी प्रिय अरहर की संटी को थोडा धीरे से मारते थे । शायद उनको खुद डर लगता हो कि अगर कोई हड्डी वड्डी टूट गयी तो फ़ालतू में रायता फ़ैल जायेगा, और वैसे भी पढाई में तो हम वैसे भी राजा बबुआ थे । तो कुल मिला कर सींकिया पहलवान होने के फ़ायदे कम और नुकसान ज्यादा ।

किशोरावस्था में कदम रखा तो कक्षा में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण बढा । परन्तु ये क्या? कोई भी कन्या हमारे प्रणयनिवेदन को सीरियसली लेने को तैयार ही नहीं । और किसी अतयंत सुन्दर कन्या से प्रणय निवेदन करने में कक्षा के बलिष्ठ लडकों से सीधी मुठभेड होने का डर । अब इस दुखी दिल की पीडा क्या सुनायें बस समझ लीजिये दिल के अरमा आँसुओं में बह गये । इस दौरान हमारा एक मित्र बना जिसका वजन कम से कम हमसे तीन गुना और नाम "सुनील अग्रवाल" था । सुनील मध्यान्ह बेला से पहले ही हमारा आधा और अपना पूरा भोजन चट कर जाते और हम दोस्ती के नाम पर कुछ न कह पाते । सुनील अग्रवाल के बारे में कभी फ़ुरसत से लिखेंगे ।


विद्यार्थी जीवन के दिन बीतते गये और एक दिन उत्तरप्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की बारहवीं कक्षा की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त होने के साथ साथ हमारा अभियांत्रिकी की प्रवेश परीक्षा में भी चयन हो गया । जब प्रवेश परीक्षा के "इन्फ़ारमेशन ब्रोशर" के सूक्ष्म प्रिंट को पढा तो ज्ञात हुआ कि काउन्सलिंग के समय न्यूनतम वजन ४१ किग्रा. होना चाहिये । जब पडौस के चक्की वाले की दुकान पर वजन कराया तो हमारे हाथों के तोते ही उड गये क्योंकि हमारा वजन ३९.५ किग्रा निकला । अब सारे घर में विचित्र सा वातावरण, कौन किसे दोषी कहे । दादी ने तो आजकल के खान पान को दोष दिया, पडोस वाली आण्टी ने कहा कि आजकल न तो पहले जैसा दूध मिलता है और न घी । पिताजी ने वैद्यजी के समान शाश्वत सत्य कहने वाली मुद्रा में कहा कि ब्रोशर ठीक से पहले पढ लिया होता तो कम से कम तीन-चार महीने थे वजन बढाने के लिये । अब १५ दिनों में १.५ किलो वजन कहाँ से बढायें ।


लोगों से सलाह ली गयी, हमारी पडौसी आण्टी ने कहा कि सुबह भीगे हुये चनों का नाश्ता, भोजन में ढेर सारा घी और पानी बिल्कुल भी नहीं, और रात को सोते समय एक बडे गिलास भरे दूध के साथ तीन केले । एक हफ़्ते तक हमारी खूब सेवा की गयी । उसके बाद दोबारा चक्की पर वजन तुलवाने गये तो काँटा वहीं का वहीं, सौ ग्राम वजन भी नहीं बढा । माताजी परेशान, दीदी मन ही मन व्यथित, दादीजी ने कई देवी देवताओं का भोग बोल दिया अगर मेरा वजन बढ जाये । पिताजी अपने मन की पीडा किसी से न कह पाये बस इतना ही सोचा होगा कि दुष्ट इतना सारा घी/दूध भी चट कर गया और वजन भी नहीं बढा ।


खैर देवी देवताओं के आशीर्वाद के सहारे हम काउंसलिंग में पहुंच गये । मेडिकल इम्तिहान से पहले छ: केले उदरस्थ किये और ढेर सारा पानी चाप लिया । वहाँ पर बैठा डाक्टर भलामानुष था और उसने वजन तौलने वाली मशीन के कांटे को गौर से देखा, हमारी ओर एक दयाद्रष्टि डाली और लिख दिया ४१ किलो । बस फ़िर क्या था हमारे मन में भविष्य के सुनहरे सपनें अंगडाई लेने लगे । घरवालों को यकीन हो गया कि उनके बुढापे में उनकी दाल रोटी का इन्तजाम हो गया । दादी ने देवी देवताओं की पूजा अर्चना पूरे धूमधाम से की और हम निकल पडे इंजीनियर बननें ।


अपने कालेज के शुरू के तीन सालों में हमने अपने लिये नये लक्ष रखे, जैसे भी हो वजन ५० किलो तो कम से कम होना ही चाहिये । हर छुट्टी में घरवाले घी और च्यवनप्राश का नया डिब्बा देते, देशी घी और मेवा युक्त बेसन के लड्डू बनाये जाते । सख्त हिदायत दी जाती कि अगर "मैस" का खाना पसन्द नहीं तो कैंटीन में खाता खुलवा लूँ और फ़लाहार में कोई कमी न रखूँ । लेकिन ५० का वो आंकडा हमे हर बार मुँह चिढा जाता । ऐसा लगता जैसे हमे दूर खडा होकर कह रहा हो कि पकडो तो जानूँ । "बनारसवाले पाण्डेय जी" कालेज में हमारे दो साल सीनियर थे और वो हमारी इस कहानी पर सनद लगा सकते हैं । हमारे दो अभिन्न मित्र थे/हैं, प्रथम वर्ष में "आदित्य गोयल" का वजन ९० किलो था और "आशीष गुप्ता" का वजन तो १०५ किलो था । हम उन दोनों को जी भरके देखते रहते, अपलक निहारते रहते और कहते "मुझको भी तो लिफ़्ट करा दे, दो चार किलो वजन बढा दे" ।
भले ही तीन सालों तक ५० किलो का वो आँकडा हमसे दूर भागता रहा लेकिन अंतिम वर्ष में हमने उसे छू ही लिया । इतनी खुशी न मेरिट में आने पर हुयी थी और न ही किसी अन्य इम्तिहान में सफ़ल होने पर ।

ऐसा लगता कि मानों अब हमारा भी कोई व्यक्तित्व है, ऐसा भ्रम होता कि कमीजे अब छोटी पड रहीं हैं, जींस अब चुस्त हो रही है। मिट्टी में अपने कदमों के निशान देखकर लगता कि हाँ अब कुछ वजन महसूस हुआ । बडे अच्छे दिन थे वो, आज भी याद करके तबीयत हरी हो जाती है ।

फ़िर दो वर्ष "भारतीय विज्ञान संस्थान" में गुजारने के बाद शोध करने के उद्देश्य से अमेरिका के टेक्सास नामक प्रान्त के ह्यूस्टन नामक नगर में "चावल विश्वविद्यालय" में आये । यहाँ आते ही फ़िर से असुरक्षा ने हमें घेर लिया । जिसे भी देखो तोंद फ़ुलाये चला आ रहा है, पुरूषों तक तो ठीक था परन्तु नारियों का भी वजन हमसे कम से कम १.५ गुना । शीघ्र ही हमें अवसाद ने घेर लिया। मित्रों ने सुझाया कि मुर्गे चीरो, बकरी खाओ तब वजन बढेगा लेकिन हमें कबीरदास का ये दोहा याद आ गया:

बकरी पाती खात है तिसकी काढी खाल,
जे नर बकरी खात हैं उनको कौन हवाल ।

हम मांसाहार का सेवन न कर सके । कुछ और लोगों ने हमारा ध्यान "चीज (ढेर सारी वसायुक्त)", "बर्गर", "पिज्जा" और "फ़्रेंच फ़्राइज" की ओर आकर्षित किया । हमें लगा की यही गुरूमंत्र है, बस लग जाओ पेट साधना करने में । पूरे छ: माह तक "चीज युक्त बर्गर और फ़्रेंच फ़्राइज" का सेवन किया, जब भी प्यास लगी जी भरकर "बीयर और कोक" पी, कोई भी ऐसी चीज जिसमें कम कैलोरीज हों त्याग दीं, परन्तु हम वहीं ढाक के तीन पात बने रहे ।

कल जब अपना वजन नापा था तो "१२० पाउन्डस" निकला था । घरवालों को एक बार फ़िर से चिंता सताने लगी है । माताजी कह रहीं थी कुछ ही महीनों में तुम २५ वर्ष के हो जाओगे, कुछ भी करके अपना वजन बढा लो वरना तुम्हारी शादी करनें में दिक्कत आयेगी । पिताजी तो सब जानते हैं फ़िर भी इस बात को हंसी में टाल जाते हैं। सुना है आजकल दादीजी का पूजापाठ फ़िर से फ़ुल स्विंग में आ गया है । दीदी ने कहा है कि जब सब कुछ करके देखा है तो थोडे से मुर्गे भी चीर के देख लो, शायद कुछ हो सके ।

मै मौन हूँ, समझ नहीं आता विधाता ने ये खेल मेरे साथ ही क्यों खेला? आप सबने मेरी कहानी यहाँ तक पढी इसके लिये धन्यवाद । ये पोस्ट आदरणीय "फ़ुरसतियाजी" की पोस्ट के समान लम्बी हो गयी है परन्तु मन के भाव बीच में रोके भी तो नहीं जा सकते । अगर आप लोगों को वजन बढाने का कोई टोना/टुटका आता हो तो अपनी टिप्पणियों के माध्यम से मेरी सहायता कीजिये ।

आपकी टिप्पणियों के इन्तजार में,

नीरज रोहिल्ला

27 टिप्‍पणियां:

  1. नीरज जी,
    मेरी तरफ से तो सहायता होने से रही। यह भी कोई समस्या है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही रहा है... बाल्यकाल से आज तक। मगर इसके फायदे अधिक समझ में आये हैं और नुकसान नगण्य।
    कोई अफसोस नहीं। एकाध बार कभी रहा हो शायद।

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  2. भैया सबकी अपनी अपनी राम कहानी, आप का वजन बढता नहीं है, ६०% अमरीका का कम नहीं होता है।

    हमारी कहानी आप से बिलकुल उल्टी है, यहां बचपन से जो चर्बी चढी है कि उतरने का नाम ही नहीं लेती, खैर..

    बढिया लिखा है.

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  3. बहूहू, नीरज जी आपकी कहानी पढ़कर हँसी भी खूब आई और दुख भी बहुत हुआ। हँसी इसलिए कि आपका अंदाजे बयाँ कमाल का था। दुख इसलिए कि आपकी कहानी १००% मिलती है। बाकी बंदो को तो मजा आ रहा होगा ये दुख सिर्फ हम जैसे सींकिया पहलवान ही समझ सकते हैं।

    बहरहाल हम ठहरे ब्लॉगिए, आपकी पोस्ट देखकर मुझे भी खुजली हो रही है कि अपने अनुभव लिखूँ, टाइम मिलने पर तसल्ली से लिखेंगे। :)

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  4. अरे भगवान ने मुझे क्यों नहीं पतला बनाया।

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  5. राजीवजी,
    फ़ायदे तो बहुत हैं, कई बार बालायें पूछती हैं कि हमारी सेहत का क्या राज है? कुछ लोगों ने तो ये तक सुझाया कि "मैक डोनाल्डस" के ब्रांड अंबेसडर क्यों नहीं बन जाते ।

    नितिनजी,

    आप चाहें तो हम आपको कुछ नुक्से बता सकते हैं परन्तु बदले में आपको भी चर्बी चढाने के कुछ तरीके बताने होंगे ।

    श्रीशजी,
    चलिये अब लगे हाथों एक सींकिंया पहलवान क्लब भी शुरू कर देते हैं। आप भी अपने अनुभवों पर जल्दी से एक पोस्ट लिखिये, हम बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं ।

    उन्मुक्तजी,

    ये ऊपर वाला जिसको देता है छ्प्पर फ़ाड के देता है और जिसे नहीं देता उसको कहीं का नहीं छोडता । बडी नाइंसाफ़ी है इस दुनिया में ।



    आप सभी की टिप्पणियों के लिये बहुत बहुत धन्यवाद ।

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  6. वाह नीरज भाई आपके दुबलेपन की कथा तो मेरे लिए बहुत कुछ आपबीती सी निकली । सारी इंजीनियरिंग इस वजन को बढ़ाने की मशक्कत में लगे रहे पर नौकरी के पहले तक के मेडिकल में पूरा जोर लगा चुकने के बाद ४२ कि.ग्रा. का आंकड़ा छू पाए ।
    नौकरी में रमने के बाद ५२ तक पहुँचे और शादी के सात आठ साल बाद अब ६५ की ऊंचाईयों को छू रहे हैं। सो आप हमारी case history देकते हुए आराम से शादी कीजिए । आगे शर्तियां फले फूलेंगे ;)

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  7. नीरज भाई,
    :) :) :) :)
    क्या कहूँ समझ नहीं आ रहा इतना हँसा की
    लगता है और किसी पर टिप्पनी करने लायक
    नहीं रहा…।
    इतना सार्थक आत्म व्याख्या…पढ़कर मजा आ
    गया बजन तो जैसा है वह वैसा ही रहेगा
    कहीं ज्यादा प्रयास में जो है वह भी न चला
    जाये…इसकारण सावधान!!! :)

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  8. मजेदा लिखा आपने,
    लगभग अभी लोग इस दौर से गुजरे हैं लगता है। मेरे विवाह के समय उम्र... ( नहीं बताऊंगा) कमर मात्र २४" थी। दर्जी के यहँ जाते तो कपड़े का नाप देने तो वो भी मसखरी करता।
    कई वर्षों से वजन भी ४९-५२ तक ही रहता था,पिछले दो साल में अब ५६ तक पहूँचा है।
    आप भी विवाह तो कर लो, वजन तो बढ़ ही जायेगा।

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  9. सही है। व्यथा-कथा आदि से अंत तक पढ़ी। पढ़ना अच्छा लगा। इसका निदान यही है कि इसी में मजा लो। जैसे ही अपने दुबलेपन से प्यार करने लगोगे वैसे ही इससे मुक्त हो जाओगे! :)

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  10. वाह नीरज भाई वाह ! क्या खूब लिखा है । ऐसे आपका ये सींकिया पहलवान वाला स्टेटस तो हमने इतने दिनो से देखा हुआ है लेकिन इसके पीछे का आपका मर्माहत हृदय आज देख सका । लम्बा लेकिन रोचक लेख था । कबीरदास जी का दोहा भी अच्छा लगा । रही बात आपकी सहायता करने की तो बस यही कह सकता हूँ कि जॉब ज्वाइन करिए, वो भी ऐसी कि जिसमे कुर्सी से उठना ना हो, मसलन सॉफ़्टवेयर फ़ील्ड की जॉब । फ़िर देखिये आपका वजन कैसे फ़टाफ़ट बढ़ता है ।

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  11. नीरज जी, आपकी दुख भरी कहानी सुनकर आपसे सहानुभूति है । कहें तो आपके लिए एक अदद डाइट चार्ट बना कर दे सकती हूँ । या फिर इस मसले पर एक चिट्ठा लिख दूँगी । पर आशा का दामन न छोड़िए । वैसे हममे से बहुत आपको अपने एक्सेस वजन देने को तैयार होंगे । किस पते पर भेजूँ बताने से १५ किलो तो भेज ही सकती हूँ ।
    घुघूती बासूती

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  12. नीरज भाई, अपने सींकिया पहलवान क्लब में एक और बन्दे को एडमिशन दे दो। अपना भी यही हाल है। मैं ने 16 वर्ष की आयु में इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया था और उस समय मेरा वज़न 40 किलो था, कद 6 फुट। सीन को आप स्वयं कल्पित कर सकते हैं। अब लगभग 75 किलो तक तो पहुँचा हूँ (164 पाउंड कितना होता है?), पर फिर भी जो मिलता है, चाहे दो दिन बाद मिले या दो साल बाद, यही पूछता है कि आप पिछली बार से कुछ कमज़ोर नहीं हो गए? मैं कहता हूँ, यार इस हिसाब से तो मैं आजतक ग़ायब हो गया होता।

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  13. ऐसा लगता है ईश्वर तुम्हारी सारी प्रार्थना का फल हमें दिये दे रहा है, इसे रिडारेक्ट भी तो नहीं कर सकते!!!


    मै इसे ब्राह्मणवर्ग का क्षत्रियों पर अत्याचार नहीं कहूँगा वरना फ़िर से "मोहल्ले" में नयी बहस प्रारम्भ हो जायेगी

    --यह बहुत मजेदार रहा!!! खैर होली है!! सब चलेगा!! हा हा

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  14. Dr Prabhat Tandon10:16 am

    नीरज , मेरा तो एक ही सुझाव है अपने से किसी दुबली लडकी को देखकर शादी कर लो , उसके समकक्ष मोटे न कहलाओ तो कहना और वैसे भी शादी के बाद मोटे तो हो ही जाओगे, मै अपना उदाहरण दे रहा हूँ, सीकिया पहलवान से अदनान सानी बन गया हूँ इतने सालों मे , अब कोई बताये कि हाय! वह बीते हुये दिन कैसे लौट के आयें।

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  15. नीरज जी,

    लेख बहूत मजेदार है, हँसी भी बहूत आयी, साथ मे भगवान जी से प्रार्थना कर रही थी कि काश मुझे भी सींकिया पहलवान बनाते, पर ऐसा आजतक नही हुआ, मेरी मेडीटेशन और योगा कक्षा मे अच्छे अच्छे लोगो ने अपना वजन घटा या बढा लिया मै जैसी कि तैसी रही :P, हाँ एक बात मजेदार है कि मेरी हालत देखने के बावजुद भी मेरी कक्षा चल रही है.. ही... ही...

    वैसे कुछ नुस्खे हैं जो आप अजमा सकते हैं, जैसे कि बदाम का हलवा, मुँगपली कि चटनी, नाश्ते मे भूनी हूई मुंगफली के साथ गर्म दूध और एक मेडिटेशन कोर्स है, आप अपना e-mail बतायें तो पूरा पैकेज मेल कर दूँगी।

    मेरा email avgroup at the rate of gamil dot com है... spammers से बचने के लिये ऐसा लिखा है... :)

    शुक्रिया
    गरिमा

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  16. maza ayya ..it was cool......if u want toh kuch nushkhe aap istemaal kar ke dekhen.........lekin aapki halat dekhkar nahin lagta ki unka bhi kuch fayda hone waala hain......lekin patla rehne main bhi kya buraaai hain.......adnan sami ko hi dekhlijiye.......fir bhi aap koshish jaari rakhiye wajan badhane ki.....kya pata bhagwaan ki aap par nazar padh hi jaye

    उत्तर देंहटाएं
  17. वाह भाई मज़ा आ गया! बचपन में हमारे साथ भी यही समस्या थी...दुबले पतले होने के साथ-साथ हम क़द में भी छोटे थे...और पंक्ति में हमको भी 'राजा-बबुआ' बन कर सबसे आगे या दूसरे-तीसरे नंबर पर खड़े होन पड़ता था!

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  18. वाह भाई मज़ा आ गया! बचपन में हमारे साथ भी यही समस्या थी...दुबले पतले होने के साथ-साथ हम क़द में भी छोटे थे...और पंक्ति में हमको भी 'राजा-बबुआ' बन कर सबसे आगे या दूसरे-तीसरे नंबर पर खड़े होन पड़ता था!

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  19. बहुत सुन्दर गाथा लिखी है आपने.
    मुझे भी यही पीडा काफ़ी समय से सता रही है.
    लगा कि ये आपकी नही मेरी ही कहानी है

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  20. vah miya khoob kahi! tumhare leye do nuskhe hein
    pehla to ek vahan lo aur us par hardam savari kiya karo, doosra aisi naukri dhoond lo ke din bhar kursi todte raho. Agar fir bhi baat na bane to shaadi kar lo, sub theek ho jayega.

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  21. Neeraj je,aapki aapbeeti our lekhani , dono hi atdbhutd hain.Aapki kathaa padkar mujhey apaney din yaad aa gaye.
    Naresh Binjola

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  22. नीरज जी वलहाला का बीयर पीकर वज़न बढ़ाने की आपकी पद्धती कामयाब होगी इसका पूर्ण विश्वास मुझको है. आप से मिलकर भी बहुत खुशी महसूस हुई. दरअसल आपकी दुविधा से कुछ सालों पहले तक मैं खुद भी प्रभावित था. पर कुछ वज़न तो तीस साल की घंटी बजते ही खुद-ब-खुद पेट के इर्द गिर्द चर्बी के रूप मे अनपेक्षित उपहार की तरह प्रस्तुत मिला. कुछ सालों की बात है आपकी निराशा दूर हुइ समझीये. आपके कुछ लेख मैं अपनी हिन्दी कक्षा के विद्यार्थीयों को पढ़वाना चाहता हूँ. अगले सेमेस्टर में मेरी कक्षा में गेस्ट लेक्चर देने का भी आपसे आग्रह करता हूँ.

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  23. बहुत अच्‍छा लगा पढ़कर काफी मजा आया, मेरे पास कोई सलाह तो नही है सिर्फ मेरा अनुभव कहना है कि ठंड़ी और गरमी के मौसम में मेरे वजन में करीब 5 से 7 किलों की घटोत्‍त्‍री बढ़ोत्‍तरी होती है :)

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  24. बेनामी3:42 pm

    SUBAH 6 KELE KHA KAR UPAR SE EK PAAV DUDH THANDA KARKE PIYO THEEK HO JAOGE.

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  25. Aap roj...din mai 3 baar ...
    250 ml milk +5 bananas + 10 almonds+10 khajor+ 4 table spoon dabur dhatupostik churan + 3 table spoon unjha rajasahi chawanprash + 10 anjeer + 4 table spoon olive oil+250 ml soya milk+ 1 sachet "mankind health ok " powder+ ambay protein powder 1 table spoon + 6 table spoon "unjha pancharist syrup ...
    En sab ko mila kr shake bna le r subah breakfast ke sath , lunch ke 1 ghantey baad and sone ke pahle ..din mai 3 baar bna kr piye...
    Har aik ghantey mai kam se kam 2 glass water and 1-2 butter biscuits khaye...
    Roj rat mai sone se pahle 20 gram isabgol ki bhusi pani ke sath khaye...
    Har 5 din mai aik bar...
    Metadec -50 mg injection+ vitamin d3 injection lagwa le ...
    Roj Subah 2 ghantey 5-7 gym mai exercises kre trainer se puch kr...
    Apni puri life mai aap kam se kam 800-900 month jiyenge ....unme aap unlimited money kamaenge...
    Ab faisla aap ka hai ki lagbhag 50000 rupees just 4 month mai kharach kr ke aap "romain reigns " ban kr jeena chahte hai ya bahut patle and chote se face bale ladke ki tarah jeena chahte hai jiska har jagah mazak odaya jata ho...
    Just 120 days kr ke dekhe jo Maine bola hai r izzat se attractive person ban kr jiye...
    Agar kuch galat likho ho to comments mai gali de dena mere bhaiyo ...
    And agar dil par lagi ho meri bat to fir kro kl se mahnat apne aap ke lia...
    Agar kuch puchna ho to comments mai likho dosto ...

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