गुरुवार, अगस्त 23, 2007

एक वेबसाईट के बहाने अमीर खुसरो के बारे में जानकारी !!

सम्भवत: आप में से कुछ लोगों ने इस वेबसाईट का भ्रमण किया हो ।
http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/welcome.html

मैं पिछले कई महीनों से इस वेबसाईट को धीरे धीरे करके पढ रहा हूँ । भारत सरकार के द्वारा निस्संदेह यह एक सराहनीय प्रयास है । आज इस वेबसाईट को भ्रमण करते करते अमीर खुसरो पर तो जैसे ज्ञान का खजाना ही मिल गया । अमीर खुसरो का जिक्र मैने अपनी कव्वाली वाली पोस्ट में किया था । इस वेबसाईट पर अमीर खुसरो के बारे में जानकारी १९ पृष्ठों में उपलब्ध है । आसानी के लिये मैने इस जानकारी को एक फ़ाईल में समायोजित करने का प्रयास किया है । इस फ़ाईल को आप MS Word or PDF दोनों रूपों में प्राप्त कर सकते हैं ।

MS word format के लिये यहाँ चटका लगायें ।

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अमीर खुसरों पहेलियों के लिये बहुत प्रसिद्ध हैं | आज अनूपजी के अंदाज में मैं आपको अमीर खुसरो की कुछ पहेलियाँ पढवाता हूँ ।

मेरी पसंद :

(१) बूझ पहेली (अंतर्लापिका)

यह वो पहेलियाँ हैं जिनका उत्तर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप में पहेली में दिया होता है यानि जो पहेलियाँ पहले से ही बूझी गई हों। जैसे -

(क) गोल मटोल और छोटा-मोटा, हर दम वह तो जमीं पर लोटा।
खुसरो कहे नहीं है झूठा, जो न बूझे अकिल का खोटा।।

उत्तर - लोटा।

यहाँ पहली पंक्ति का आखिरी शब्द ही पहेली का उत्तर है जो पहेली में कहीं भी हो सकता है। इन पहेलियों का उत्तर पहेलियों में ही होता है। खुसरो की बूझ पहेलियों के भी दो वर्ग बनाए जा सकते हैं। कुछ में तो उत्तर एक ही शब्द में रहता है जैसा कि हम ऊपर देख चुके हैं। दूसरी पहेली में कभी-कभी उत्तर के लिए दो शब्दों को मिलाना पड़ता है। जैसे –

(ख) श्याम बरन और दाँत अनेक, लचकत जैसे नारी।
दोनों हाथ से खुसरो खींचे और कहे तू आ री।।

उत्तर - आरी। यहाँ दूसरी पंक्ति के आखिरी शब्द 'आ' और 'री' को मिलाने से उत्तर मिलता है।

(ग) हाड़ की देही उज् रंग, लिपटा रहे नारी के संग।
चोरी की ना खून किया वाका सर क्यों काट लिया।
उत्तर - नाखून।

(घ) बाला था जब सबको भाया, बड़ा हुआ कुछ काम न आया।
खुसरो कह दिया उसका नाव, अर्थ करो नहीं छोड़ो गाँव।।

उत्तर - दिया।


(ञ) नारी से तू नर भई और श्याम बरन भई सोय।
गली-गली कूकत फिरे कोइलो-कोइलो लोय।।
उत्तर - कोयल।

(च) एक नार तरवर से उतरी, सर पर वाके पांव
ऐसी नार कुनार को, मैं ना देखन जाँव।।
उत्तर - मैंना।

(छ) सावन भादों बहुत चलत है माघ पूस में थोरी।
अमीर खुसरो यूँ कहें तू बुझ पहेली मोरी।।
उत्तर - मोरी (नाली)

(२) बिन बूझ पहेली या बहिर्लापिका, इसका उत्तर पहेली से बाहर होता है। उदाहरण –
(क) एक नार कुँए में रहे, वाका नीर खेत में बहे।
जो कोई वाके नीर को चाखे, फिर जीवन की आस न राखे।।
उत्तर – तलवार
(ख) एक जानवर रंग रंगीला, बिना मारे वह रोवे।
उस के सिर पर तीन तिलाके, बिन बताए सोवे।।
उत्तर - मोर।

(ग) चाम मांस वाके नहीं नेक, हाड़ मास में वाके छेद।
मोहि अचंभो आवत ऐसे, वामे जीव बसत है कैसे।।
उत्तर - पिंजड़ा।

(घ) स्याम बरन की है एक नारी, माथे ऊपर लागै प्यारी।
जो मानुस इस अरथ को खोले, कुत्ते की वह बोली बोले।।
उत्तर - भौं (भौंए आँख के ऊपर होती हैं।)

(ञ) एक गुनी ने यह गुन कीना, हरियल पिंजरे में दे दीना।
देखा जादूगर का हाल, डाले हरा निकाले लाल।
उत्तर - पान।

(च) एक थाल मोतियों से भरा, सबके सर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।
उत्तर – आसमान

(३) दोहा पहेली

कुछ पहेलियाँ अमीर खुसरो ने ऐसी भी लिखीं जो साथ में आध्यात्मिक दोहे भी हैं।

उदाहरण -

(क) उज्जवल बरन अधीन तन, एक चित्त दो ध्यान।
देखत मैं तो साधु है, पर निपट पार की खान।।
उत्तर - बगुला (पक्षी)

(ख) एक नारी के हैं दो बालक, दोनों एकहि रंग।
एक फिर एक ठाढ़ा रहे, फिर भी दोनों संग।
उत्तर - चक्की।

(ग) आगे-आगे बहिना आई, पीछे-पीछे भइया।
दाँत निकाले बाबा आए, बुरका ओढ़े मइया।।
उत्तर – भुट्टा

(घ) चार अंगुल का पेड़, सवा मन का फ्ता।
फल लागे अलग अलग, पक जाए इकट्ठा।।
उत्तर - कुम्हार की चाक

(ञ) अचरज बंगला एक बनाया, बाँस न बल्ला बंधन धने।
ऊपर नींव तरे घर छाया, कहे खुसरो घर कैसे बने।।
उत्तर - बयाँ पंछी का घोंसला

(च) माटी रौदूँ चक धर्रूँ, फेर्रूँ बारम्बर।
चातुर हो तो जान ले मेरी जात गँवार।।
उत्तर – कुम्हार

(छ) गोरी सुन्दर पातली, केहर काले रंग।
ग्यारह देवर छोड़ कर चली जेठ के संग।।
उत्तर - अहरह की दाल।

(ज) ऊपर से एक रंग हो और भीतर चित्तीदार।
सो प्यारी बातें करे फिकर अनोखी नार।।
उत्तर – सुपारी

(झ) बाल नुचे कपड़े फटे मोती लिए उतार।
यह बिपदा कैसी बनी जो नंगी कर दई नार।।
उत्तर - भुट्टा (छल्ली)




अमीर खुसरो के बारे में दी गयी फ़ाईल को सहेजकर फ़ुरसत में पढना न भूलें । आपकी सेवा में एक बार फ़िर से लिंक प्रस्तुत हैं ।

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7 टिप्‍पणियां:

  1. इस साइट के रूप में तो बहुत बड़ा खजाना दे दिया है. कई बार में देखा जायेगा. और खुसरो वाली फाइल तो पीडीएफ में डाउनलोड कर ली है.
    बहुत धन्यवाद!

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  2. हाँ ्जी, और इसी साइट पर लोक संगीत (Downloadable)का भी अच्छा खासा संग्रह मौजूद है, यहाँ देखें

    http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/aud_0001.htm

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  3. मैं इसे बीते एक वर्ष से देख रहा हूं। वाकई बहुत प्रशंसनीय काम है भारत सरकार का। खुसरों व अन्य लोगों की संगीत रचनाएं भी यहां संकलित है।

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  4. इस साईट को काफी समय से देखता आ रहा हूँ. अच्छा किया इतने रोचक तरीके से सब तक यह लिंक पहुँचाया. आभार.

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  5. आपकी प्रस्तुती पसंद आयी। आपने तो साईट का पता देकर बहुत अच्छा किया है। अब आराम से पढेंगे।

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  6. बहुत अच्छे नीरज जी. आप की पोस्ट तो बीते दिनों में ले गयी. अरसे बाद कुछ पुराना और अच्छा (interesting) पढने को मिला.

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  7. HI Neeraj,
    Duirng visit of Radiovani blog, I saw Anardhwani blog of yours. Still I m exploring it. Just I have seen your Post on Amir Khusro. I Have down loaded it. Very nice treatise. Thanks for it. About me - I m Rishi Tanwar, living in Rajasthan. I m a Civil Engineer in Govt. Job.
    Again thanks. I wish to comment in Hindi script in this box, but I dont Know, how it is possible.

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