सोमवार, अप्रैल 27, 2009

जिया मोहयेद्दीन: आवाज के बाद कुछ लिखने की जरूरत भी नहीं।







5 टिप्पणियाँ:

  1. बेशक, सुनने के बाद लिखने की कोई जरूरत नहीं।

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    S.B.A.
    TSALIIM.

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  2. हमने तो सुना, पर भाषा में गरीबी आड़े आ गयी समझने में।

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  3. SirJi , kanha hain aap ? kuch likh nahee rahe hain aaj-kal .roj aapke blog par aakar vapas jana padta hai . Exam me busy hain kya ?

    Regards-
    Gaurav Srivastava

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