शुक्रवार, फ़रवरी 20, 2009

घूँघट चक वो सजना (फ़िर से बुल्ले शाह) वडाली बन्धुओं की आवाज में !!!

कल की पोस्ट से बुल्लेशाह का जो खुमार चढा है वो अभी तक उतरा नहीं है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुये आज सुनिये अपने वडाली बन्धुओं की आवाज में "घूँघट चक वो सजना"। आशा है आपको पसन्द आयेगा, :-)

8 टिप्‍पणियां:

  1. एक से एक उम्दा पसंद है भई..आनन्द आ जाता है.

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  2. बदाली बंधुओं की आवाज में जो कशिश है वो अलग ही है .... आ gya

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  3. फ़ालो करें और नयी सरकारी नौकरियों की जानकारी प्राप्त करें:
    सरकारी नौकरियाँ

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  4. बाबा बुल्लेशाह का एक बार जिस पर खुमार चढ गया वो फ़िर सारी उम्र नही उतर पाया. और आवाज के जादूगरों वडाली बंधुओं की तो बात ही निराली है.

    इसे जितनी बार सुनो, पर मन और और की मांग करता है.

    बहुत धन्यवाद.

    रामराम.

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  5. सुंदर प्रस्तुति मेरे ब्लॉग पर पधार कर "सुख" की पड़ताल को देखें पढ़ें आपका स्वागत है
    http://manoria.blogspot.com

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  6. उम्दा! वबस लोड होनी की प्रक्रिया मेँ धैर्य का इम्तहान होता है।

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