मंगलवार, सितंबर 04, 2007

टैक्सीगिरी के किस्से, (बोनस में एक सुन्दर सी नज्म सुनिये) ।

शेखर ने मई के महीने में चहकते हुये बताया कि वो दो महीने के लिये डाओ कैमिकल्स (Dow Chemicals) के मुख्यालय मिडलैंड, मिशीगन में इंटर्नशिप करने जा रहा है । हमने एक अच्छे मित्र की तरह तुरन्त बधाई दी और पार्टी की माँग भी कर दी । शेखर ने ये भी बताया कि वो मिशीगन में अपनी कार भी ले जाने की तैयारी कर रहा है । हमने कहा कि अकेले इतनी लम्बी (~१५०० मील) कार यात्रा थोडी मुश्किल रहेगी । इस बात पर शेखर ने अपनी कातिल मुस्कान के साथ हमें सूचना दी कि हम उसके साथ इस यात्रा पर चल रहे हैं । फ़िर, बिना हमारी सलाह के सारा कार्यक्रम बनाकर हमें खबर दी गयी कि,

१) हम जून में उसके साथ मिशीगन तक टैक्सी चालक की हैसियत से उसके साथ चलेंगे और उसके बाद वायुयान द्वारा वापिस ह्यूस्टन आ जायेगें ।
२) सितम्बर में हम वायुयान से दोबारा मिशीगन जायेंगे और पुन: टैक्सीगिरी करते हुये वापिस ह्यूस्टन आयेगें ।
३) इस यात्रा के दौरान हमें भोजन भत्ता और रात में विश्राम करने के लिये होटल भत्ता दिया जायेगा ।
४) इस दौरान हुयी किसी अप्रिय घटना के जिम्मेवार हम स्वयं होंगे (इसकी जानकारी आगे दी जायेगी) ।

ह्यूस्टन से मिशीगन के रास्ते का नक्शा:


वापिसी के समय सोच विचार कर दूसरा रास्ता चुना गया जिससे कि यात्रा का रोमांच बना रहे एवं कुछ नये प्रदेशों के दर्शन का मौका मिले । वापिसी का रास्ता नीचे दिये मानचित्र में अंकित है ।

मिशीगन से ह्यूस्टन वापसी के रास्ते का नक्शा (साथ में जाने का रास्ता भी दिखाया गया है ):


संक्षेप में यात्रा के मुख्य बिन्दु:
१) आना और जाना मिलाकर हमने लगभग ३२०० मील की दूरी तय की ।
२) इस पूरी यात्रा में केवल एक बार पुलिस ने हमें (मुझे) तेज गाडी चलाते हुये पकडा । इसके लिये मुझे $१३० का जुर्माना देना पडा ।
३) रास्ते में दूसरे दिन का पडाव डेटन (Dayton, Ohio) शहर था । हवाईजहाज का आविष्कार करने वाले राइट बन्धु डेटन शहर के ही रहने वाले थे । हमने वहाँ रूक कर राइट बन्धुओं को समर्पित एक संग्रहालय में थोडा समय बिताया ।
३) हमारी मंजिल (मिडलैंड, मिशीगन) आशा से भी छोटा कस्बा (गाँव) निकला । वहाँ पर Dow Chemical के अलावा और कुछ भी नहीं था । ह्यूस्टन जैसे विराट शहर (अमेरिका के चौथे सबसे बडे नगर) में रहने के बाद इतने छोटे कस्बे को देखना अच्छा लगा ।
४) हमारी वापिसी की यात्रा के दौरान हम अमेरिका के मध्य-पश्चिमी इलाके से गुजरे । अमेरिका का ये इलाका बिल्कुल सपाट है और दूर दूर तक केवल मक्के के खेत नजर आते हैं । ये इलाका बाईबल बैल्ट के नाम से भी जाना जाता है ।


संक्षेप में सिर्फ़ इतना ही, कुछ दिनों में मौका लगा तो थोडा विस्तार में कुछ चटपटे अनुभवों को लिखूँगा । जब हम पिछली बार यात्रा पर गये थे तो उसी समय नारद पर बजार के एक चिट्ठे को लेकर बवाल हो गया था, इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ, अच्छी बात है :-)

वैसे आजकल ज्ञानदत्तजी वजन को लेकर काफ़ी हल्ला मचा रहे हैं । उन्हे ज्ञात रहे कि युवा अगरबत्ती संघ इस बात को लेकर मानहानि का दावा कर सकता है :-)

अन्त में एक संयोग वाली बात:
अपनी कार यात्रा के दौरान मैं "अजनबी शहर में अजनबी रास्ते, मेरी तन्हाई पर मुस्कुराते रहे" को कार में बैठकर अपने लैपटाप पर सुन रहा था । वापिस लौटने पर पाया कि इसी गीत का जिक्र युनुसजी ने अपने चिट्ठे पर उसी दिन किया था । है न बिल्कुल संयोग की बात ?

उसी प्रविष्टी में युनुस जी ने एक और गाने का भी जिक्र किया था, "जिनसे हम छूट गये अब वो जहाँ कैसे हैं"

ये गीत अभी कुछ साल पहले "पैगाम-ए-मोहब्बत" नाम से जारी हुये एल्बम में था । इस एल्बम में भारत और पाकिस्तान के कलाकारों ने मिलकर गीत गाये थे । अपनी इस प्रविष्टी के अंत में मैं आपको इसी एल्बम की सबसे पहली नज्म सुनवा रहा हूँ :

गुलाम तुम भी थे यारों, गुलाम हम भी थे
नहा के खून में आयी थी फ़स्ले-आजादी ।
मजा तो तब था कि मिलकर इलाज-ए-जाँ करते,
खुद अपने हाथ से तामीर-ए-गुलसिताँ करते ।
हमारे दर्द में तुम और तुम्हारे दर्द में हम शरीक होते,
तो जश्ने आशियाँ करते ।

तुम आओ गुलशने लाहौर से चमन बरदोश,
हम आयें सुबह बनारस की रोशनी लेकर,
हिमालय की हवाओं की ताजगी लेकर,
और उसके बाद ये पूछें कौन दुश्मन है ?


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6 टिप्‍पणियां:

  1. 1. अपनी यात्रा के विषय में विस्तार दें.
    2. अगरबत्ती संघ की साइट का एड्रेस क्या है? वह संघ अपने भविष्य के/उम्रदराज सदस्यों का पंजीकरण करता है?

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  2. अच्छी नज़्म सुनवाई आपने !

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  3. बढ़िया!! और विवरण की प्रतीक्षा रहेगी!!

    ज्ञानदत्त जी ध्यान दें-- युवा अगरबत्ती संघ के हम जैसे सदस्य अभी अपना अपना ब्लॉग चला रहे हैं, जैसे ही नई कार्यकारिणी गठित हो जाएगी, अपना साइट भी बना लेंगे। उम्रदराज़ युवाओं के पंजीयन के लिए नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव आ चुका है जल्द ही विचार किए जाने की संभावना है----- धन्यवाद!!
    प्रवक्ता
    युवा अगरबत्ती संघ

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  4. बढ़िया। इस किस्से को कुछ विस्तार से, मजे ले-लेकर बयान करें।

    एक अच्छा यात्रा वृतांत बन जाएगा।

    नज़्म वाकई अच्छी है।

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  5. पहले तो स्पष्टीकरण दें कि नुक्कड़ तक आकर निकल गये और खबर तक न की. ऐसी क्या नाराजगी है. नक्शे में ऑन्टारियो के बाजू से लाल लाईन खींचते हुऐ तुम्हारे हाथ नहीं काँपें, आँख नहीं भर आई.

    पाईन्ट वाईज यात्रा वृतांत-नोट बना रहे हो कि कहानी सुना रहे हो??

    यात्रा को तो विस्तार दिया नहीं कम से कम किस्से को ही दो. उतनी दूर से कौन कितनी बार आता है?? थोड़ा गुस्सा तो लगी है.

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  6. जो हमे अच्छा लगे.
    वो सबको पता चले.
    ऎसा छोटासा प्रयास है.
    हमारे इस प्रयास में.
    आप भी शामिल हो जाइयॆ.
    एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

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