सोमवार, मार्च 15, 2010

अगर ये पोस्ट अझेल लगे तो दोष दीप्ति को देना !!!

हमने कुछ हफ़्तों पहले लिखा था कि दीप्ति जल्दी ही वैवाहिक बन्धन (कैसा बन्धन?) नहीं नहीं वैवाहिक सम्बन्ध में बंधने वाली हैं। तो दीप्ति की शादी भी हो गयी और उनके पडौस वाली ब्यूटी पार्लर वाली आंटीजी ने उनपर जो अत्याचार किये उसकी भी किस्सा उन्होने यहाँ हिंग्लिश में लिखा है, ;-)

दीप्ति ने कुछ दिन पहले हमें टैग किया था कि हम अपने पसन्दीदा १० फ़िल्मी डायलाग लिखें, तो लीजिये हाजिर हैं बिना किसी वरीयता के क्रम में (स्मृति से):


१) मैं हूँ जुर्म से नफ़रत करने वाला, शरीफ़ों के लिये ज्योति और तुम जैसे गुंडो के लिये ज्वाला। नाम है शंकर और हूँ मैं गुंडा नम्बर वन...प्रभुजी फ़िल्म गुंडा में.



४) आज हमने पहली बार आपको इतने करीब से देखा है, आपको भरपूर पहरेदारी की जरूरत है। फ़िल्म: हासिल

५) You have to get over your first love to be free. (कसम से बडी गहरी बात है) फ़िल्म: हज़ारो ख्वाहिशें ऐसी

६) इस १० मिनट के सीन में अनेको हीरे छुपे हुये हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ में "हे...हे हे...हे" मोहनीश बहल का कहना, "हे प्रेम रिलेक्स, टेक इट ईजी, कूल इट यार"...भारत की Pop जेनरेशन का पहला बीज यहीं से पडा था। उसके बाद मोहनीश भाई एक और बम्पर मारते हैं, "भूखे तो हम भी हैं..." उसके बाद श्री श्री श्री १००८ मोहनीश बहल महाराज एक और ज्ञान देते हैं, "एक लडका और लडकी कभी दोस्त नहीं हो सकते" याद नहीं होस्टल में कितनी बार इस डायलाग को सुना होगा, ;) फ़िल्म: मैने प्यार किया

आज का लौंडा ये कहता हम तो बिस्मिल थक गये, अपनी आजादी तो भैया लौंडिया के तिल में है।
हाथ की खादी बनाने का जमाना लद गया, आज तो चड्डी भी सिलती इंगलिशों की मिल में है।

फ़िल्म: गुलाल

८) तुम्हारा नाम क्या है बसन्ती...

९) हमने आपके पांव देखे हैं, बेहद हसीन हैं; इन्हे जमीन पे न रखियेगा मैले हो जायेंगे । फ़िल्म: पाकीजा

१०) गहने तुडवाओ, गहने बनवाओ और कौडियाँ खेलो (कसम से बहुत दर्द है इस फ़िल्म में)....फ़िल्म: साहिब बीवी और गुलाम...


14 टिप्‍पणियां:

  1. Mast mazaa aayaa... :)
    piyush mishra ko mera aashirvaad hai... :)

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  2. आप डायलोग चुने और उसमे आपके-हमारे प्रभु का डायलोग ना हो!! हो ही नहीं सकता.. सबसे पहले प्रभु जा जयकारा.. "बोलो मिथुन दा कि, जय.."

    दीप्ति का ब्लॉग पढ़के मज्जा आ गिया, हम तो वईसने ब्लॉग हरमेंसा ढूंढते रहते हैं.. उस जैसे ब्लॉग को ही हम सुद्ध ब्लोगिंग मानते हैं.. उस तक चहुपाने के सुक्रिया.. :)

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  3. कल ही धर्म पाजी की एक पुरानी फिल्म "पाप को जला कर राख कर दूंगा" का ट्रेलर देखा था ......शाम को किसी जुल्मी का.........

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  4. ओर पियूष मिश्रा के तो बहुत बड़े पंखे है

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  5. बड़ा ही उम्दा collection है ...:)...मैंने प्यार किया का dialogue मैं भूल कैसे गयी..:))...मज़ा आ गया..:)

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  6. जो लोग ज़िन्दगी मे बहुत डोयलोग बोलते है जब समय आता है तो वे चुप रह जाते है ...
    अरे अरे ये किसी फिल्म का डॉयलॉग नही है भाई ..यह मैने लिखा है । दीप्ति जी को सलाम ।

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  7. अरे भाई प्रभुजी और हासिल कभी अझेल लग सकते हैं ! यह कह कर आपने प्रभुजी का अपमान किया है.

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  8. संग्रहनीय सचमुच

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  9. होओओ बिन्दास..
    अब कब मिलोगे.. बाबू जी ?

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  10. हा..हा सारे ही डायलॉग चुन कर लाये हैं...पर हासिल का वह डायलॉग बहुत ही मजेदार था....और साहब बीवी गुलाम में कौडियाँ खेलने की सलाह भी थी??...मुझे तो बस गहने बनवाओ ,गहने तुडवाओ ही याद है.

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  11. गुलाल का गीत सच में आनन्द दे गया ।

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  12. aapake yaha bahut dino bad aayaa.

    vaise teen Dialogue aapako yaad hai?

    ye shaadi nahee ho sakatee. kaha do ki ye jhoot hai, mai tumhaare bacche kee maa banane vaalee hoo!!

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  13. फ़िल्में देखना तो लगभग हम छोड़ ही चुके हैं, पर आपके इन डॉयलाग से पुराने दिन याद आ गये और दिमाग पर जोर देकर डॉयलाग याद करने की कोशिश कर रहे थे कि शायद कोई याद आ जाये पर नहीं आया, लगता है फ़िल्में देखना वापिस शुरु करना पड़ेगी।

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