दीप्ति ने कुछ दिन पहले हमें टैग किया था कि हम अपने पसन्दीदा १० फ़िल्मी डायलाग लिखें, तो लीजिये हाजिर हैं बिना किसी वरीयता के क्रम में (स्मृति से):
१) मैं हूँ जुर्म से नफ़रत करने वाला, शरीफ़ों के लिये ज्योति और तुम जैसे गुंडो के लिये ज्वाला। नाम है शंकर और हूँ मैं गुंडा नम्बर वन...प्रभुजी फ़िल्म गुंडा में.
२) तुम्हारी ये गोली लोहे के इस शरीर के पार नहीं जा सकती (वीडियो भी देखें): फ़िल्म: लोहा
३) इफ़ यू कैन गिब मी बोट, एंड आई कैन गिब यू...क्लास आन टाईम, एक्जामेनेसन आन टाईम, नीट एंड क्लीन उनिबस्टी (इसको जरूर देखें): फ़िल्म: हासिल
४) आज हमने पहली बार आपको इतने करीब से देखा है, आपको भरपूर पहरेदारी की जरूरत है। फ़िल्म: हासिल
५) You have to get over your first love to be free. (कसम से बडी गहरी बात है) फ़िल्म: हज़ारो ख्वाहिशें ऐसी
६) इस १० मिनट के सीन में अनेको हीरे छुपे हुये हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ में "हे...हे हे...हे" मोहनीश बहल का कहना, "हे प्रेम रिलेक्स, टेक इट ईजी, कूल इट यार"...भारत की Pop जेनरेशन का पहला बीज यहीं से पडा था। उसके बाद मोहनीश भाई एक और बम्पर मारते हैं, "भूखे तो हम भी हैं..." उसके बाद श्री श्री श्री १००८ मोहनीश बहल महाराज एक और ज्ञान देते हैं, "एक लडका और लडकी कभी दोस्त नहीं हो सकते" याद नहीं होस्टल में कितनी बार इस डायलाग को सुना होगा, ;) फ़िल्म: मैने प्यार किया
आज का लौंडा ये कहता हम तो बिस्मिल थक गये, अपनी आजादी तो भैया लौंडिया के तिल में है।
हाथ की खादी बनाने का जमाना लद गया, आज तो चड्डी भी सिलती इंगलिशों की मिल में है।
फ़िल्म: गुलाल
८) तुम्हारा नाम क्या है बसन्ती...
९) हमने आपके पांव देखे हैं, बेहद हसीन हैं; इन्हे जमीन पे न रखियेगा मैले हो जायेंगे । फ़िल्म: पाकीजा
१०) गहने तुडवाओ, गहने बनवाओ और कौडियाँ खेलो (कसम से बहुत दर्द है इस फ़िल्म में)....फ़िल्म: साहिब बीवी और गुलाम...



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