शनिवार, मार्च 22, 2008

परदेश की होली का आँखो देखा हाल !!!

राईस विश्वविद्यालय में भारतीय विद्यार्थी संघ ने हर साल की तरह इस बार भी होली का आयोजन किया । इस प्रविष्टी में हम आपको इस भव्य आयोजन का आंखो देखा हाल तस्वीरों के साथ पेश कर रहे हैं ।

कल रात को हम अपने तीन अन्य मित्रों के साथ बालीवुड की बहुचर्चित फ़िल्म "रेस" देखने गये । फ़िल्म के बारे में फ़िर कभी लेकिन रात को सोते सोते २ बज गये । सुबह १०:२० मिनट पर अलसाई आंखों से नींद खुली और याद आया कि आज तो सुबह १० बजे होली खेलने जाना था । बिस्तर पर ही अजदकी मुद्रा में दो बार पलटी मारने के बाद हाथ में मोबाईल आया । दोस्तों को फ़ोन लगाया तो पता चला कि हम ही सबसे पहले उठ गये थे, कई दोस्तों को दोस्ती का वास्ता देकर होली खेलने जाने को राजी किया । एक पुरानी सी टी-शर्ट, थोडे से फ़टे जूते और एक नया सा पायजामा पहनकर हम होली के रंग में रंगने के लिये निकल पडे ।

मेरे दोनो रूममेट में से कोई भी अपनी कार निकालने को तैयार नहीं था (एक की गाडी में तेल खत्म हो गया था तो दूसरी की में कुछ और गडबड थी :-) )। लिहाजा हमें अपने गरीब रथ को निकालना पडा और दोस्तों को ताकीद की कि कई सारे पुराने अखबार रख लो जिससे कि वापिस लौटते समय कपडे बचें तो सीट पर अखबार बिछाकर बैठ जाना वरना अखबार लपेटकर घर आ जाना :-)

जब कालेज पँहुचे तो वहाँ का दॄश्य अवर्णनीय था । एक बडे से हरे मैदान पर ७-८ लोग खडे होकर भीड जमने का इन्तजार कर रहे थे । हमने दूर से ही हाथ हिलाकर अपने आने का संकेत दिया तो देखा कि वो सभी हाथों में पानी से भरे गुब्बारे और बाल्टी में पानी लेकर हमारी तरफ़ आने लगे । हमने उनको कहा कि थोडा सब्र करो हम खुद ही तुम्हारे पास आये जाते हैं । पहले हमें गुलाल में स्नान कराया गया और उसके बाद ३-४ बाल्टी पानी डाला गया । तब तक मैदान में पानी से कीचड जैसा कुछ नहीं बन पाया था । बदन में थोडी तरावट आ गयी तो हमने भी बाकी लोगों को रंग लगाकर, गले लगाकर होली की बधाईयाँ दी ।

इसके बाद लोग आते रहे और सभी रंग, पानी और पानी भरे गुब्बारों से उनका स्वागत करते रहे । बीच बीच में कुछ विदेशी भी हमारे हल्ले में शामिल हुये और फ़िर जल्दी ही पतली गली से निकल लिये । तभी एकमत (ये हमारा ही था) से निर्णय लिया गया कि इस बार प्राकृतिक रूप से होली खेली जायेगी । पानी के दोनों पाईपों का बहाव मैदान के एक हिस्से पर केन्द्रित करने के उपरान्त थोडे ही प्रयास से मिट्टी और पानी से समागम से गीली मिट्टी कीचड जैसी दिखने लगी । अब चूँकि मिट्टी और पानी दोनो प्राकृतिक तत्व हैं इसमे मिलावट का तो प्रश्न ही पैदा नहीं होता है । सभी लोगों ने ध्वनिमत से हमारी सोच का समर्थन किया और हमें पहला शिकार आता दिखायी दिया ।

हमारे परममित्र होली खेलने सपत्नीक आ रहे थे । उनको मिट्टी में लेटाकर और ऊपर से ढेर सारा पानी डालकर इस महान Environmentally Friendly होली का श्रीगणेश किया गया । देखने लायक बात थी कि उनकी पत्नी ने उनको जमीन पर लेटाने और ऊपर से पानी उडेलने में हम सबका भरसक सहयोग किया । इतने पर पत्नीजी की अन्य सहेलियों ने पत्नीजी को मिट्टी में बैठाकर रंग लगाने का कार्यक्रम प्रारम्भ कर दिया था ।

अब किसी का कभी भी नम्बर लग सकता था । १५-२० लोगों की भीड किसी भी शख्स का नाम ले लेती थी और तुरन्त उसका हैप्पी बर्थडे मन जाता था । हमारे पुराने अनुभव ने हमें बताया कि ऐसे में जितना जल्दी नंबर लग जाये उतना अच्छा होता है । यही सोचकर जब हमारे नाम का उद्घोष हुआ तो हम स्वयं ही कीचड में जाकर बैठ गये, एक हाथ से पानी का पाईप पकडा और अपने आप को गीला कर लिया । आस पास वाले १-२ लोगों ने हम पर ३-४ बाल्टी मिट्टी का पानी डाला और हमारा होली संस्कार सम्पन्न हो गया । इसके बाद हमें किसी का भी होली संस्कार करने का लाइसेंस भी मिल गया था ।

तुरन्त नये नये तरीके आजमाये जाने लगे । दोस्तों को साथ बैठाकर, पति पत्नी को साथ बैठाकर, रिसर्च इंट्रेस्ट के हिसाब से लोगों को बैठाकर सबका होली संस्कार किया गया । मजे की बात थी कि कोई जोर जबरदस्ती नहीं थी :-) सब कुछ एक पूर्ववत घोषित कार्यक्रम की तरह चलता चला जा रहा था । इस प्रकार पानी, मिट्टी, गुलाल, मिट्टी, फ़िर गुलाल, फ़िर पानी और अन्त में कीचड के साथ सबका होली संस्कार सम्पन्न हुआ ।


अन्त में तस्वीरें जिससे सनद रहे ।


(भारतीय विद्यार्थी संघ की अध्यक्षा अनुभा गोयल का होली संस्कार)


(भारतीय विद्यार्थी संघ के उपाध्यक्षा गौतम किमि का होली संस्कार)

(कहीं कोई जबरदस्ती नहीं, सभी पूरी मौज के मूड में थे)

(अब दोस्तों के साथ थोडी जोर जबरदस्ती तो चलती ही है)

(सभी होली की उमंग में घर से हजारो मील दूर, लेकिन सभी एक परिवार की तरह)
हमें उचककर अपना फ़ोटो खिंचवाते हुये देखा जा सकता है :-)

(होली के रंग में देसी क्या और विदेशी क्या सब मस्त थे)
ध्यान दें मेहमानों को पूरे सम्मान से साथ बिना मिट्टी के होली का आनन्द लेने की छूट थी :-)


(मौका मिले और सारी लडकियाँ एक साथ फ़ोटो न खिंचवायें, ऐसा हुआ है कभी? )


(होली खेलने के बाद बढिया मिठाई का मजा ही कुछ और था)


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7 टिप्‍पणियां:

  1. शानदार है होली के रंग। नीरज की शकल साफ़ नजर आ रही है। कन्यायें खूबसूरत लग रही हैं। सब कुछ धांसू च फ़ांसू। आनन्दित हुए।

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  2. क्या भाग्य है! हम यहां गंगा किनारे भी घर में कोरे बैठे हैं और आप परदेश में होली का रंग जमा लिये। बधाई हो जी!

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  3. मस्त है।
    अब कन्याओं और खूबसूरती पे कमेंट हमरा अधिकार है ये जानते हुए भी पहले शुकुल जी ने चिपका दिया फ़ेर हम का कहें:(

    होली की बधाई व शुभकामनाएं आपको भी!!

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  4. हम्‍म । हमने मिस किया । ये जो कीचड़ में कूदम-कादी है ये हमें भी बहुत पसंद है । अरे भई कोई ज्ञान जी को भी रंग लगाए, वो कोरे बैठे हैं :D

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  5. बड़िया रही जी, कुछ गाने वाने भी हो जाते तो और रंग जम जाता न , ढोलक का भी इंतजाम करना था न, मुझे पक्का पता है गाना तो आप गाते होगें।

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  6. नीरज बहुत पसंद आई आपकी होली। और फोटो तो सभी की बिल्कुल मस्त आई है।

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  7. बहुत बढिया होली खेली आपने.. हमने तो अपने काम का फोटो भी चुन लिया.. :P

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